मोबाइल टैरिफ में महंगाई की मार: साल 2025 की दूसरी छमाही में जब देश के आम आदमी को थोड़ी राहत की उम्मीद थी, तभी एक और महंगाई की लहर मोबाइल यूजर्स की जेब पर दस्तक देने जा रही है। देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां – Jio, Airtel और Vodafone Idea – अपने मोबाइल रिचार्ज और डेटा प्लान्स को फिर से महंगा करने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार टैरिफ में 10 से 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
पिछले साल भी लगा था झटका:
याद कीजिए, जुलाई 2024 में भी कंपनियों ने अपने प्लान्स के दाम 11% से 23% तक बढ़ा दिए थे। उस समय भी आम आदमी को अपनी जेब ढीली करनी पड़ी थी। अब, एक साल भी नहीं बीता और फिर से वही स्थिति बनने जा रही है। इस बार कंपनियां “टियर-बेस्ड” (स्तर-आधारित) प्राइसिंग की रणनीति अपना सकती हैं, यानी अलग-अलग यूजर्स के लिए अलग-अलग कीमतें – जैसे मिड और हाई रेंज प्लान्स वालों को ज्यादा चुकाना पड़ेगा, जबकि बेसिक यूजर्स को थोड़ी राहत मिल सकती है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
मई 2025 में देश में 74 लाख नए एक्टिव मोबाइल यूजर्स जुड़े हैं, जिससे कुल एक्टिव यूजर्स की संख्या 108 करोड़ के पार पहुंच गई है – यह पिछले 29 महीनों का रिकॉर्ड है। कंपनियों का मानना है कि अब लोग महंगे प्लान्स भी लेने को तैयार हैं, खासकर वे जो ज्यादा डेटा या प्रीमियम सर्विसेस इस्तेमाल करते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियां अब “वन साइज फिट्स ऑल” (एक जैसा प्लान सबके लिए) मॉडल छोड़कर, डेटा स्पीड, टाइम स्लॉट या डेटा यूसेज के हिसाब से अलग-अलग कीमतों वाले प्लान ला सकती हैं। यानी, देर रात इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों या कम डेटा यूज करने वालों को अलग टैरिफ मिल सकता है।
आम आदमी की मुश्किलें:
मोबाइल अब सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि पढ़ाई, बिजनेस, बैंकिंग, और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। खासकर छोटे शहरों और गांवों में, जहां लोग ऑनलाइन क्लासेज, सरकारी योजनाओं की जानकारी, और डिजिटल पेमेंट्स के लिए मोबाइल पर निर्भर हैं, वहां टैरिफ बढ़ना सीधा असर डालता है।
रवि कुमार, जो दिल्ली में एक प्राइवेट जॉब करते हैं, कहते हैं, “पिछले साल से ही हर महीने मोबाइल पर खर्च बढ़ता जा रहा है। पहले 200-250 रुपये में काम चल जाता था, अब वही प्लान 300-350 रुपये का हो गया है। अगर फिर बढ़ोतरी हुई, तो मिडिल क्लास के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।”
टेलीकॉम कंपनियों की मजबूरी या मुनाफाखोरी?:
कंपनियां तर्क देती हैं कि बढ़ती लागत, 5G नेटवर्क का विस्तार, और सरकारी लाइसेंस फीस के चलते टैरिफ बढ़ाना जरूरी है। वहीं, ग्राहक सवाल उठाते हैं कि जब यूजर्स की संख्या बढ़ रही है और कंपनियों का रेवेन्यू भी, तो बार-बार महंगाई क्यों थोप दी जाती है?
अब सवाल है – क्या सरकार या रेगुलेटरी अथॉरिटी (TRAI) इस बढ़ोतरी पर लगाम लगाएगी, या फिर आम आदमी को हर साल मोबाइल रिचार्ज के नाम पर और ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी? फिलहाल, कंपनियों की तैयारी पूरी है और यूजर्स को एक बार फिर अपने बजट का हिसाब-किताब बदलना पड़ सकता है।








