B.Tech की पढ़ाई अब बस ₹1 में: शहर की धड़कन है उम्मीद। और जब इस उम्मीद का नाम हो – बेटियां, तब कहानी और भी मायने रखती है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (HBTU) ने ऐसे ही असंख्य सपनों को वास्तविकता में बदलने का बीड़ा उठाया है।
अब SC/ST वर्ग की मेधावी बेटियों को सिर्फ ₹1 में इंजीनियर बनने का मौका मिलेगा। क्या आप यकीन कर सकते हैं – हां, सच है! HBTU ने एक ऐसी अनोखी स्कीम लॉन्च की है, जिसका असर ना सिर्फ उन बच्चियों और उनके परिवारों पर पड़ेगा, बल्कि पूरे समाज की सोच में भी बदलाव ला सकता है।
आर्थिक तंगी पर अब सपना नहीं तोड़ेगी:
बहुत सी होनहार बेटियों का सपना होता है कि वो B.Tech करके इंजीनियर बनें, पर पैसों की कमी अक्सर उनके कदम रोक देती है। फीस, किताबें, हॉस्टल – इन सबका खर्च कई घरों के लिए नामुमकिन सा है। HBTU की नयी योजना इसी दर्द को समझती है; और इसका जवाब है – सिर्फ ₹1 में पूरी B.Tech डिग्री।
कैसे मिलेगा मौका? यहाँ देखें पूरी प्रक्रिया:
- इस योजना के तहत, हर साल SC/ST वर्ग की दो टॉपर बेटियों को मौका दिया जाएगा।
- इन दोनों का एडमिशन सामान्य प्रक्रिया से होगा; बाकी बच्चों की तरह इन्हें भी पूरी फीस पहले देनी होगी।
- बाद में यूनिवर्सिटी पूरी फीस लौटा देगी – और छात्रा सिर्फ ₹1 में डिग्री ले पाएगी।
- यह स्कीम 2025-26 से लागू की जाएगी।
- भविष्य में लाभार्थी बेटियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
सरकार का विशेष शासनादेश और यूनिवर्सिटी की सोच:
योजना को उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष शासनादेश (G.O.) के तहत मंजूरी मिली है। HBTU के डीन डॉ. ललित कुमार सिंह ने बताया कि, “हमारी कोशिश है कि उन बेटियों तक पहुंचें, जो जिदंगी को लेकर सपने देखती हैं, लेकिन गरीबी उनके पंख काट देती है।” HBTU मानती है कि शिक्षा में इन्क्लूजन (समावेश) और Equal Opportunity (समान अवसर) देना वक्त की जरूरत है।
ये सिर्फ स्कीम नहीं, भरोसे की शुरुआत है:
सोचिए, किसी गांव या कस्बे की वो बेटी, जिसकी मां ने खेत में पसीना बहाकर, पिता ने मजदूरी कर-करके पढ़ाया… अब उसे पढ़ाई में फीस की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। ₹1 जमा कर वो बच्ची न सिर्फ अपनी डिग्री पाएगी, बल्कि एक नई मिसाल भी कायम करेगी।
यह योजना उन परिवारों के लिए भी आशा है, जो अक्सर सोचते हैं कि ‘बेटे को पढ़ाना चाहिए, बेटी को नहीं, क्योंकि खर्चा ज्यादा है।’ अब यह सोच भी धीरे-धीरे बदलना तय है।
समाज में लहराएगी बदलाव की हवा:
HBTU कानपुर की यह पहल बाकी तकनीकी संस्थानों के लिए भी रोल मॉडल (आदर्श) बन सकती है। आखिरकार, शिक्षा का असली मकसद है – हर बच्चा, हर बच्ची आगे बढ़े; जाति, धर्म या जेब की बाधा उनके रास्ते में न आए।
यह खबर, महज ‘Breaking News’ नहीं बल्कि समाज की consciousness (जागरूकता) को जगाने वाली है। शिक्षा में ये कदम केवल आंकड़ा या डेटा नहीं, ये है उम्मीद, आत्मनिर्भरता और नये समाज की नींव। ऐसे प्रयास तब होते हैं जब किसी एक यूनिवर्सिटी या प्रशासन के मन में बच्चों के लिए सच्चा जज्बा हो।
आज जब हर माता-पिता अपनी बेटी को डॉक्टर, इंजीनियर, पायलट या IPS बनने का सपना दिखाता है, तो HBTU की यह योजना उन सपनों को पंख देने के लिए एक मजबूत ‘प्लैटफॉर्म’ (मंच) बन सकती है। यह है सशक्त भारत की ओर बढ़ता सच।
यूँ तो देश में हज़ारों स्कॉलरशिप्स, योजनाएं चल रही हैं – लेकिन ‘₹1 में B.Tech’ अपने आप में अलग है, और समाज को बदलने वाली भी।
अब, उम्मीद है कि आने वाले सालों में और भी बेटियां HBTU जैसे संस्थानों की बदौलत, अपनी कामयाबी की कहानी खुद लिखेंगी।
कहानी जारी रहेगी… क्योंकि सपनों की उड़ान का कोई अंत नहीं होता।








