जोधपुर के प्रतापनगर में दिनदहाड़े दहशत: 10 गाड़ियों पर लाठियों-सरियों का कहर, दो आरोपी गिरफ्तार, पांच नाबालिग हिरासत में
जोधपुर, 7 मार्च 2026: रंग-बिरंगे होली के ठीक बाद जोधपुर के प्रतापनगर इलाके में एक ऐसा काला अध्याय लिखा गया, जिसने पूरे मोहल्ले को दहशत में डुबो दिया। दिन के उजाले में हथियार लहराते बदमाशों ने करीब 10 गाड़ियों को लोहे की रॉड, लाठियों और सरियों से तोड़-फोड़ कर दिया। बच्चियों से मामूली विवाद के बाद भड़का यह उत्पात अब पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद थम गया है। दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि पांच नाबालिगों को हिरासत में ले लिया गया। लेकिन सवाल वही है – क्या हमारा समाज अब बच्चों के खेल को भी बर्दाश्त नहीं कर पाएगा?
क्या है प्रतापनगर की पूरी घटा
यह घटना 3 मार्च की दोपहर की है। प्रतापनगर के के-207 के पास एक संकरी गली में कुछ मासूम बच्चियां होली खेल रही थीं। हंसी-खुशी में रंग मलते हुए वे अपनी छोटी दुनिया में खोई हुई थीं। तभी लाल रंग की मोटरसाइकिल पर सवार होकर कुछ युवक आए। बिना किसी ठोस वजह के उन्होंने बच्चियों से झगड़ा शुरू कर दिया। गाली-गलौज हुई, धक्का-मुक्की हुई। बच्चियां डर गईं, लेकिन मामला यहीं थम न गया। लगभग डेढ़ घंटे बाद वही बदमाश लौटे – इस बार हाथों में खतरनाक हथियारों से लैस। लोहे की रॉडें, मोटी लाठियां, भारी सरियां – सब कुछ लेकर उन्होंने गली में खड़ी गाड़ियों पर टूट पड़े।
शोर-शराबा मच गया। कारों के शीशे चटक गए, बॉडी पर गहरे घाव हो गए। करीब 10 वाहनों को निशाना बनाया गया। मोहल्ले वाले घरों में घुस गए, दरवाजे बंद कर लिए। बदमाशों ने न सिर्फ गाड़ियां तोड़ीं, बल्कि जाते-जाते लोगों को खुली धमकी भी दी – "पुलिस में शिकायत की तो जान से मार देंगे!" कई घरों के दरवाजों पर सरियों से वार किए गए। पूरा इलाका भय के साये में डूब गया। एक बुजुर्ग निवासी ने बताया, "हमने सोचा जंग छिड़ गई है। बच्चे रो रहे थे, महिलाएं कांप रही थीं। कौन सोचेगा कि होली के दिन ऐसा खौफनाक मंजर बनेगा?"
पीड़ित की शिकायत पर हुई कार्यवाही के बाद
पीड़ित धरेन्द्र गर्ग ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने प्रतापनगर सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई। बस, फिर क्या था – पुलिस ने फौरन कमर कस ली। डीसीपी (पश्चिम) विनीत कुमार बंसल ने एसीपी रविन्द्र बोथरा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की। थानाध्यक्ष गोविन्द व्यास और डीएसटी (पश्चिम) प्रभारी महेंद्र सिंह ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले। आसपास के कैमरों में बदमाशों की मोटरसाइकिल और चेहरे कैद हो चुके थे। मुखबिरों की सूचना से पुख्ता क्लू मिला। आखिरकार, प्रतापनगर सदर थाने के पीछे इंदिरा कॉलोनी से देवराज वाल्मिकी (19) और सुदेश वाल्मिकी (18) को दबोच लिया गया। दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पांच नाबालिग साथी भी फरार थे, जिन्हें शीघ्र ही हिरासत में ले लिया गया। अब सभी से पूछताछ चल रही है।
पुलिस ने जल्द कारवाही के दिए निर्देश
डीसीपी बंसल ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, "यह संगठित अपराध नहीं, बल्कि आवेश का नतीजा था। लेकिन कानून सबके लिए बराबर है। हमने तेजी से कार्रवाई की ताकि इलाके में विश्वास बना रहे।" पुलिस ने आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 427 (संपत्ति को नुकसान), 506 (धमकी) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। नाबालिगों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।
यह घटना सिर्फ तोड़फोड़ का मामला नहीं। यह हमारे समाज की उस कड़वी हकीकत को उजागर करती है, जहां छोटे-मोटे विवाद खूनी खेल बन जाते हैं। प्रतापनगर जैसे घनी आबादी वाले इलाके में युवा बेरोजगारी और नशे की लत ने बिगड़ैल तत्वों को जन्म दे दिया है। बच्चियों से झगड़ा – यह कितना शर्मनाक है! होली का त्योहार, जो एकता और भाईचारे का प्रतीक है, उसी के दिन यह काला कारनामा। मोहल्ले की महिलाओं ने बताया, "हम अब शाम को बाहर नहीं निकलते। बच्चे डरते हैं। पुलिस तो पकड़ लाई, लेकिन मानसिक आघात कब मिटेगा?"
आखिर हमारे देश क्अ युवा किस दिशा मे जा रहा
हर रोज कितने ऐसे मामले देखे जाते जो कभी जाति के नाम पर, कभी जमीन पर, कभी व्यक्तिगत दुश्मनी पर। लेकिन बच्चों के साथ मारपीट? यह सीमा पार करना है। जोधपुर पुलिस की तारीफ करनी होगी – 48 घंटे में आरोपी पकड़े गए। लेकिन सजा भी सख्त होनी चाहिए। नाबालिगों को सुधारगृह भेजना काफी नहीं; उनके परिवारों को जागरूक करना जरूरी है। समाज को सोचना होगा – क्या हमारा युवा वर्ग सही दिशा में जा रहा है? स्कूल-कॉलेज बंद होने के बाद सड़कों पर बिंदास घूमते ये बच्चे कल के अपराधी न बनें।
प्रतापनगर अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। "ऐसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस।" लेकिन असली सवाल समाज से है – क्या हम बच्चों को सुरक्षित माहौल दे पाएंगे? क्या विवादों को बातचीत से सुलझाएंगे?
यह कहानी जोधपुर की नहीं, पूरे राजस्थान की है। जहां तेज रफ्तार विकास के साथ अपराध भी तेजी से पनप रहे हैं। होली के रंग धुल गए, लेकिन यह काला दाग आसानी से न धुलेगा। आरोपी सलाखों के पीछे हैं, न्याय की उम्मीद बंधी है। लेकिन समाज को आईना देखना होगा। बच्चों का बचपन लौट आए, यही हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसलिए मानवता के साथ सुखी जीवन जीने की रहा अपनाए
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