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राजस्थान में मानसून की आफत: चित्तौड़गढ़ में गांवों का संपर्क कटा, हनुमानगढ़ में पुल धंसा, कोटा में बाढ़ के हालात, पाली में नदी के टापू पर फंसे पति-पत्नी

राजस्थान में मानसून की आफत: चित्तौड़गढ़ में गांवों का संपर्क कटा, हनुमानगढ़ में पुल धंसा, कोटा में ब
राजस्थान में मानसून की आफत: चित्तौड़गढ़ में गांवों का संपर्क कटा, हनुमानगढ़ में पुल धंसा, कोटा में ब

राजस्थान में मानसून की रफ्तार ने इस बार कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुधवार को प्रदेश के कोटा, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, पाली सहित कई इलाकों में हालात बेकाबू हो गए। कहीं गांवों का संपर्क कट गया, कहीं पुल धंस गया, तो कहीं लोग नदी के टापू में फंस गए। मौसम विभाग ने अगले तीन दिन के लिए राज्य के अधिकांश हिस्सों (जैसलमेर को छोड़कर) में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

कोटा: घर, स्कूल, मंदिर तक डूबे, बैराज के 5 गेट खुले

कोटा के मोड़क कस्बे और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं। घर, स्कूल, अस्पताल, एटीएम और मंदिर तक में पानी भर गया है। कई जगहों पर चार-चार फीट तक पानी घरों में घुस गया। हालात को देखते हुए कोटा बैराज के 19 में से 5 गेट खोलने पड़े, ताकि पानी का स्तर नियंत्रित किया जा सके। गांधी सागर, जवाहर सागर और अन्य बांधों में भी पानी की निकासी जारी है। कोटा संभाग के झालावाड़ और कोटा में पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है—झालावाड़ के परवन बांध पर 225 मिमी और भीमसागर बांध पर 205 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई।

चित्तौड़गढ़: गांवों का संपर्क कटा, नदी का पानी पुल के ऊपर

चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में गूंजली नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है। इससे आधा दर्जन से ज्यादा गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। जवाहर सागर बांध के दो गेट खोलकर 34 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास के इलाकों में जलस्तर और बढ़ गया है। मौसम विभाग ने चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, कोटा, बूंदी, उदयपुर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, बारां, झालावाड़ और राजसमंद जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

हनुमानगढ़: पुल धंसा, आवाजाही ठप

हनुमानगढ़ के पीलीबंगा क्षेत्र में जाखड़ांवाली-हनुमानगढ़ मार्ग पर बना एक पुराना पुल भारी बारिश के चलते धंस गया। इससे इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह बंद हो गया। जिले के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पाली: नदी के टापू में फंसे पति-पत्नी, पुलिस ने किया रेस्क्यू

पाली जिले में सुबह से ही तेज और रिमझिम बारिश जारी रही। सोजत क्षेत्र में गुड़िया और लीलड़ी नदी में पानी बढ़ गया। लीलड़ी नदी के पास उदेशी कुआं गांव में एक दंपती अपनी 15 बकरियों के साथ टापू पर फंस गए। स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। बारिश के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे ऐसे हादसे हो रहे हैं।

भीलवाड़ा, ब्यावर, उदयपुर: सड़कों पर जलभराव, जनजीवन प्रभावित

भीलवाड़ा जिले के गुलाबपुरा में 6 इंच (145 मिमी) बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर की सड़कों, कॉलोनियों और बाजारों में पानी भर गया। रेलवे अंडरपास में भी पानी भरने से ट्रैफिक बाधित हुआ। ब्यावर, उदयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर सहित कई जिलों में लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।

मौसम विभाग का अलर्ट और कारण

मौसम विभाग ने बताया कि पूर्वी राजस्थान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Cyclonic Circulation) बना हुआ है और मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) भी श्रीगंगानगर से होकर गुजर रही है। बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर सिस्टम (Low Pressure System) राजस्थान के करीब पहुंच गया है, जिससे अगले 3-4 दिन और तेज बारिश की संभावना है। बुधवार को उदयपुर, राजसमंद, बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।

ग्रामीण और शहरी जीवन प्रभावित

बारिश के चलते कई जिलों में स्कूल, अस्पताल, बाजार, मंदिर, एटीएम तक में पानी भर गया है। ग्रामीण इलाकों में गांवों का संपर्क कट गया है। सड़कों, पुलों और रेलवे ट्रैक्स पर पानी भरने से यातायात बाधित हुआ है। कई जगह बिजली आपूर्ति भी बाधित है। प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए टीमें तैनात कर दी हैं।

मौसम विभाग ने अगले तीन-चार दिन पूरे राज्य (जैसलमेर को छोड़कर) में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। नदियों, बांधों और तालाबों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों, नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन की मदद लें।

राजस्थान में मानसून ने इस बार कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। कोटा, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, पाली, भीलवाड़ा, झालावाड़, उदयपुर, बारां, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, राजसमंद, बूंदी, प्रतापगढ़, टोंक, जयपुर, अलवर, धौलपुर, भरतपुर जैसे जिलों में अगले तीन-चार दिन सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन और राहत दल पूरी मुस्तैदी से जुटे हैं, लेकिन आमजन को भी सावधानी बरतनी होगी

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